[Hindi] वो प्रश्न जो हर उत्तर से परे रहा: सृष्टि के मिथक से आत्म-साक्षात्कार तक।

[Hindi] वो प्रश्न जो हर उत्तर से परे रहा: सृष्टि के मिथक से आत्म-साक्षात्कार तक।

May 8, 2026

About this episode

The episode explores the concept of creation myths and self-realization from various religious perspectives.

[Quick links] [Pause]         शायद इस धरती पर अपने आप से यह पूछने वाला कि वह यहाँ कैसे आया है, केवल मनुष्य ही है। बाकी सभी जीव तो इस बात में ही व्यस्त हैं कि इस जगत में कैसे जियाजाए! अधिकांश धर्मों में ऐसी सृष्टि कथाएँ मिलती हैं जो बताती हैं कि किसी एक सर्वशक्तिमान ईश्वर ने इस जगत को रचा है। इन कथाओं के कई रूप हैं। मनुष्य सृष्टिकर्ता को अपने जैसा ही कल्पित करता है — अधिकार, करुणा, उदारता और पितृत्व के भाव के साथ। क़ुरान के 49वें अध्याय के 13वें श्लोक में अल्लाह कहता है: - "हे मानवजाति! हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया है, और तुम्हें विभिन्न जातियों और क़बीलों में इसलिए बाँटा है ताकि तुम एक दूसरे को पहचानो — न कि एक दूसरे से घृणा करने के लिए।" - इसी तरह की कहानी बाइबल में भी मिलती है। वहाँ ईश्वर आदम और हव्वा को रचता है, और कहा जाता है कि पूरी मानवजाति इसी मूल युगल से आई है। हिंदू धर्म में भी जगत के सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की कथा है। इन सभी कथाओं के अनुसार, सृष्टिकर्ता और सृष्टि अलग हैं। सृष्टिकर्ता मूल स्रोत है और यह सृष्टि उसी से उत्पन्न हुई है। लेकिन इन कथाओं में एक रोचक बात यह है कि ये मनुष्य को ही ईश्वर का सीधा वंशज दिखाती हैं। बाकी सभी जीव मानो जैसे मनुष्य की सेवा के लिए ही हों! पर यह सरल दृष्टिकोण, जो सृष्टि को एक मानवीय क्रिया मानता है, भारत…

More episodes of Let's THINK : By Dr.King, Swami Satyapriya

Explore listener stats, chart rankings, contacts and more on the Let's THINK : By Dr.King, Swami Satyapriya podcast page.