
इस एपिसोड में भगवान शिव देवी पार्वती की तपस्या की परीक्षा लेते हैं और उनके अटूट प्रेम का उदाहरण प्रस्तुत किया जाता है।
शिव पुराण के पच्चीसवें अध्याय में भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण रूप धारण कर देवी पार्वती की कठोर तपस्या की परीक्षा लेने आते हैं। पार्वती जी अपने पूर्व जन्म (सती) का स्मरण करती हैं और बताती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में प्राप्त करना चाहती हैं। तीन हजार वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भी जब शिवजी प्रकट नहीं होते, तो पार्वती अग्नि में प्रवेश करने का निश्चय करती हैं। किंतु उनकी तपस्या की शक्ति से अग्नि भी ठंडी हो जाती है। तब शिवजी उनकी निष्ठा और दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेते हैं। यह अध्याय भक्ति, धैर्य, तपस्या और अटूट प्रेम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। 📌 इस वीडियो में जानिए: शिवजी ने ब्राह्मण रूप क्यों धारण किया? पार्वती ने अग्नि में प्रवेश क्यों किया? तपस्या की सच्ची परीक्षा क्या होती है? शिव-पार्वती मिलन का आध्यात्मिक महत्व 🙏 यदि आपको शिव पुराण की यह कथा पसंद आए तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
Books & works: शिव पुराण, श्रीरुद्र संहिता
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