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सप्तऋषियों का शिव के पास आगमन | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 36
Jun 21, 2026
Unknown duration
हिमालय का शिवजी के साथ पार्वती के विवाह का निश्चय करना | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 35
Jun 14, 2026
Unknown duration
पद्मा–पिप्पलाद की कथा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 34
Jun 7, 2026
7m 16s
राजा अनरण्य और पद्मा विवाह की कथा - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33
Jun 1, 2026
6m 15s
वशिष्ठ मुनि का उपदेश - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32
May 24, 2026
6m 25s
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|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 6/21/26 | ![]() सप्तऋषियों का शिव के पास आगमन | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 36 | शिव पुराण के अध्याय 36 में सप्तऋषि कैलाश पर्वत पहुँचकर भगवान शिव को हिमालय और मैना की स्वीकृति का समाचार देते हैं। वे भगवान शिव से वैदिक रीति से देवी पार्वती का पाणिग्रहण संस्कार करने का अनुरोध करते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह की तैयारियों का शुभारंभ होता है और सभी देवताओं, ऋषियों तथा दिव्य शक्तियों को विवाह में आमंत्रित करने की चर्चा होती है।✔ सप्तऋषियों का कैलाश आगमन✔ भगवान शिव को विवाह का संदेश✔ पार्वती के वाग्दान की सूचना✔ शिवजी की विनम्रता और विवाह पर चर्चा✔ देवताओं और ऋषियों को विवाह हेतु आमंत्रणयदि आपको शिव पुराण की दिव्य कथाएं पसंद आती हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें।ॐ नमः शिवाय#ShivPuran #ShivPuranHindi #Adhyay36 #ShivParvatiVivah #Mahadev #Kailash #Saptarishi #ShivKatha #SanatanDharma #LordShivaइस अध्याय में जानिए: | — | ||||||
| 6/14/26 | ![]() हिमालय का शिवजी के साथ पार्वती के विवाह का निश्चय करना | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 35 | शिव पुराण के अध्याय 35 में सप्तऋषियों और देवी अरुंधती द्वारा हिमालय और मैना को समझाने के बाद शिव-पार्वती विवाह का निर्णय लिया जाता है। हिमालय भगवान शिव की महिमा को स्वीकार करते हुए अपनी पुत्री पार्वती को शिवजी की अमानत घोषित करते हैं। सप्तऋषि पार्वती को आशीर्वाद देते हैं और विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं।इस अध्याय में जानिए:✔ भगवान शिव की सर्वोच्च महिमा✔ हिमालय द्वारा विवाह की स्वीकृति✔ पार्वती को सप्तऋषियों का आशीर्वाद✔ शिव-पार्वती विवाह की तैयारी✔ शुभ विवाह मुहूर्त का निर्धारणयदि आपको शिव पुराण की कथाएं पसंद आती हैं तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें।#ShivPuran #ShivPuranHindi #Adhyay35 #ShivParvatiVivah #LordShiva #Parvati #ShivKatha #HindiPauranikKatha #Mahadev #SanatanDharma | — | ||||||
| 6/7/26 | ![]() पद्मा–पिप्पलाद की कथा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 34✨ | शिव पुराणपद्मा+4 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | — | शिव पुराणपद्मा+5 | — | 7m 16s | |
| 6/1/26 | ![]() राजा अनरण्य और पद्मा विवाह की कथा - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33✨ | राजा अनरण्यपद्मा विवाह+5 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | — | शिव पुराणराजा अनरण्य+6 | — | 6m 15s | |
| 5/24/26 | ![]() वशिष्ठ मुनि का उपदेश - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32✨ | शिव पुराणवशिष्ठ मुनि+4 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | — | शिव पुराणमहर्षि वशिष्ठ+5 | — | 6m 25s | |
| 5/17/26 | ![]() सप्तऋषियों ने हिमालय और मैना को समझाया | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 31✨ | शिव पुराणसप्तऋषि+3 | — | — | हिमालयमैना | शिव पुराणअध्याय 31+6 | — | 9m 33s | |
| 5/11/26 | ![]() ब्राह्मण वेष में पार्वती के घर गए शिव | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 30✨ | शिव पुराणपार्वती+4 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | हिमालय | शिवपार्वती+5 | — | 5m 07s | |
| 4/26/26 | ![]() शिवजी द्वारा हिमालय से पार्वती को मांगना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 29✨ | शिव पुराणभगवान शिव+4 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | हिमालयमैना | शिवजीपार्वती+7 | — | 7m 27s | |
| 4/19/26 | ![]() शिव-पार्वती संवाद और विवाह का निर्णय | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 28✨ | शिव-पार्वती संवादविवाह का निर्णय+3 | — | — | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता+3 | — | 5m 32s | |
| 4/12/26 | ![]() पार्वती जी का क्रोध और शिव का प्रकट होना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 27✨ | भक्तिधैर्य+3 | — | Stream Panther Networkशिव पुराण+1 | — | पार्वती जीभगवान शिव+3 | — | 8m 45s | |
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| 4/5/26 | ![]() पार्वती को शिवजी से दूर रहने का आदेश | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 26✨ | शिव पुराणपार्वती+3 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | — | शिवपार्वती+3 | — | 7m 13s | |
| 3/30/26 | ![]() शिवजी ने ली पार्वती की तपस्या की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 25✨ | शिवजीपार्वती+4 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | — | शिवजीपार्वती+5 | — | 5m 48s | |
| 3/22/26 | ![]() सप्तऋषियों ने ली पार्वती की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 24✨ | पार्वती की परीक्षासप्तऋषि+3 | — | शिव पुराणश्रीरुद्र संहिता | — | सप्तऋषिपार्वती+5 | — | 9m 34s | |
| 3/16/26 | ![]() देवताओं ने शिव से किया विवाह का अनुरोध | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 23 | शिव पुराण के तेईसवें अध्याय में देवता भगवान शिव से पार्वती जी से विवाह करने का निवेदन करते हैं।भगवान शिव विवाह को एक बंधन बताते हैं और समझाते हैं कि कैसे काम, क्रोध और मोह तपस्या में बाधा डालते हैं।फिर भी भक्तों की रक्षा के लिए वे पार्वती से विवाह करने का निर्णय लेते हैं।📌 इस वीडियो में जानिए:शिव विवाह को बंधन क्यों कहते हैं?शिव का वैराग्य भाव क्या है?भक्तों के लिए शिव क्या त्याग करते हैं? | — | ||||||
| 3/9/26 | ![]() देवताओं का शिवजी के पास जाना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 22 | शिव पुराण के बाईसवें अध्याय में देवताओं पर आए संकट का वर्णन मिलता है। तारकासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में जाते हैं।भगवान विष्णु, ब्रह्मा और अन्य देवताओं के साथ मिलकर शिवजी से प्रार्थना की जाती है कि वे पार्वती जी से विवाह करें ताकि उनके पुत्र द्वारा तारकासुर का वध हो सके।यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और ईश्वर की शरणागति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।📌 इस वीडियो में जानिए:तारकासुर कौन था?देवता क्यों भयभीत हुए?शिवजी ने क्या उत्तर दिया?शिव विवाह का रहस्य क्या है?🙏 वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। | — | ||||||
| 3/1/26 | ![]() पार्वती की तपस्या - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21 | शिव पुराण का इक्कीसवां अध्याय देवी पार्वती की अद्भुत, कठोर और अलौकिक तपस्या का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ पार्वती सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगोत्री तीर्थ में घोर तपस्या आरंभ करती हैं।वे पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप करती हैं। फलाहार से प्रारंभ होकर पत्तों के त्याग और अंततः निराहार साधना तक उनकी तपस्या बढ़ती जाती है। भोजन त्याग देने के कारण देवताओं द्वारा उन्हें ‘अपर्णा’ नाम दिया जाता है।तीन हजार वर्षों तक की गई यह तपस्या न केवल ऋषि-मुनियों के लिए आश्चर्यजनक थी, बल्कि संपूर्ण प्रकृति को भी पवित्र और दिव्य बना देती है। यह अध्याय भक्ति, संयम, धैर्य और शिव-प्राप्ति के लिए आत्मसमर्पण का दिव्य संदेश देता है। | — | ||||||
| 2/22/26 | ![]() शिवजी के वियोग में पार्वती का शोक और तपस्या का आरंभ - शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 20 | शिव पुराण का बीसवां अध्याय देवी पार्वती के गहन शोक, विरह और आत्मचिंतन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत करता है। कामदेव के भस्म होने के बाद पार्वती का हृदय शिव-वियोग से व्याकुल हो उठता है। यह अध्याय बताता है कि किस प्रकार देवी पार्वती सांसारिक सुखों से विरक्त होकर भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या का संकल्प लेती हैं।इस अध्याय में भक्ति, वैराग्य, आत्मसंयम और तप की महिमा का विस्तार से वर्णन है, जो साधकों को यह सिखाता है कि अहंकार के त्याग और शुद्ध भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। बीसवां अध्याय शिव-भक्तों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है। | — | ||||||
| 2/15/26 | ![]() शिव क्रोधाग्नि की शांति- शिव पुराण - कामदेव भस्म कथा | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 19 | शिव पुराण का उन्नीसवाँ अध्याय बताता है कि कैसे भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उत्पन्न क्रोधाग्नि से कामदेव भस्म हो गए और ब्रह्मा जी ने उस अग्नि को समुद्र में सुरक्षित रखकर सृष्टि की रक्षा की। यह अध्याय शिव के रौद्र और करुणामय स्वरूप का अद्भुत वर्णन करता है।शिव पुराण अध्याय 19शिव क्रोधाग्नि की शांतिकामदेव भस्म कथाभगवान शिव तीसरा नेत्रशिव पुराण हिंदीशिव क्रोध कथासमुद्र में क्रोधाग्निब्रह्मा और शिव कथा | — | ||||||
| 2/8/26 | ![]() कामदेव का भस्म होना - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 18 | शिव पुराण का अठारहवाँ अध्याय एक अत्यंत मार्मिक और दिव्य प्रसंग प्रस्तुत करता है, जिसमें कामदेव भगवान शिव को मोहित करने के प्रयास में उनके तीसरे नेत्र की अग्नि से भस्म हो जाते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की कठोर तपस्या, कामदेव द्वारा चलाए गए बाणों का निष्फल होना, रति का विलाप तथा देवताओं की करुण प्रार्थना का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह कथा वैराग्य, संयम, तपस्या और अहंकार के नाश का गहरा आध्यात्मिक संदेश देती है। शिव पुराण का यह अध्याय बताता है कि ब्रह्मांड की शक्तियाँ भी भगवान शिव की इच्छा और तप के सामने क्षीण हैं। कामदेव का भस्म होना केवल विनाश नहीं, बल्कि धर्म और संतुलन की स्थापना का प्रतीक है।seoशिव पुराण अठारहवाँ अध्याय, कामदेव का भस्म होना, कामदेव शिव कथा, शिव तीसरा नेत्र, रति विलाप कथा, शिव तपस्या प्रसंग, कामदेव भस्म कथा, शिव पुराण हिंदी | — | ||||||
| 2/2/26 | ![]() कामदेव का शिव को मोहित करने के लिए प्रयाण | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 17 | शिव पुराण का सत्रहवाँ अध्याय कामदेव के उस महत्वपूर्ण प्रयाण का वर्णन करता है, जिसमें देवताओं के कष्ट निवारण हेतु वे भगवान शिव को मोहित करने का प्रयास करते हैं। इस अध्याय में तारकासुर के अत्याचार, देवी पार्वती की तपस्या, इंद्रदेव की चिंता तथा शिव-पार्वती विवाह की पृष्ठभूमि का गूढ़ आध्यात्मिक विवरण मिलता है।--Shiv Puran Adhyay 17 में कामदेव को देवताओं द्वारा शिव को मोहित करने का कार्य सौंपा जाता है, ताकि तारकासुर का वध संभव हो सके। यह अध्याय भक्ति, तपस्या, योग, वैराग्य और शिव-पार्वती के दिव्य मिलन की भूमिका को गहराई से प्रस्तुत करता है। | — | ||||||
| 1/25/26 | ![]() तारक का स्वर्ग त्याग शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 16 | शिव पुराण का षोडशवाँ अध्याय तारकासुर के पतन की दिशा में एक निर्णायक मोड़ प्रस्तुत करता है। भगवान शिव के आदेश से तारकासुर स्वर्ग का त्याग करता है और पृथ्वी पर शोनित नगर में शासन प्रारंभ करता है। देवता पुनः स्वर्गलोक लौटते हैं और इंद्र के नेतृत्व में स्वर्ग का संतुलन स्थापित होता है।यह अध्याय अहंकार, वरदान के दुरुपयोग और धर्म के मार्ग से विचलन के परिणामों को स्पष्ट करता है। शिव पुराण की यह कथा दर्शाती है कि जब अधर्म बढ़ता है, तब स्वयं महादेव व्यवस्था को पुनः संतुलित करते हैं। यह अध्याय भक्तों को धैर्य, आज्ञाकारिता और धर्म के महत्व का गहन बोध कराता है।शिव पुराण कथा के इस अध्याय का श्रवण करने से भक्तों को जीवन में विवेक, संयम और ईश्वर की लीला को समझने की प्रेरणा मिलती है। | — | ||||||
| 1/18/26 | ![]() तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 15 | शिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा। यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्म का अंत निश्चित है। शिव पुराण का यह अध्याय भक्तों को धर्म, संयम और शिव तत्व के महत्व का बोध कराता है। | — | ||||||
| 1/11/26 | ![]() तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 14 | शिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा। यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्म का अंत निश्चित है। शिव पुराण का यह अध्याय भक्तों को धर्म, संयम और शिव तत्व के महत्व का बोध कराता है।शिव पुराण पंद्रहवाँ अध्याय, तारकासुर का जन्म, तारकासुर तपस्या, तारकासुर कथा, शिव पुराण तारकासुर, देवताओं पर तारकासुर का अत्याचार, तारकासुर वरदान कथा, शिव पुराण हिंदी कथा | — | ||||||
| 1/4/26 | ![]() पार्वती-शिव का दार्शनिक संवाद | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 13 | यह अध्याय शिव पुराण के उस अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन करता है जहाँ देवी पार्वती भगवान शिव की कठोर तपस्या, सेवा और भक्ति द्वारा उनके हृदय को जीत लेती हैं। देवताओं के कल्याण हेतु पार्वती-शिव का दिव्य संयोग आवश्यक था, क्योंकि तारकासुर के वध के लिए शिव के तेजस्वी पुत्र का जन्म होना था। इस अध्याय में पार्वती की निष्ठा, कामदेव का भस्म होना, शिव की समाधि, और अंततः देवी पार्वती की तपस्या की सिद्धि का अत्यंत प्रेरणादायक वर्णन मिलता है। यह कथा भक्ति, त्याग, धैर्य और शिव-शक्ति के दिव्य रहस्य को प्रकट करती है।seoशिव पुराण कथा, पार्वती तपस्या, शिव पार्वती विवाह कथा, महादेव कथा, शिव शक्ति संयोग, तारकासुर वध कथा, देवी पार्वती भक्ति, शिव पुराण अध्याय, सनातन धर्म कथा, शिव भक्ति कथा | — | ||||||
| 12/28/25 | ![]() शिव पुराण - पार्वती को सेवा में रखने के लिए हिमालय का शिव को मनाना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 12 | बारहवें अध्याय में हिमालय द्वारा भगवान शिव को पार्वती की सेवा के लिए मनाने की पवित्र कथा सुनाई गई है। इस प्रसंग में हिमालय का भक्तिभाव, शिवजी की तपस्या, और पार्वती की महाशक्ति का गूढ़ स्वरूप उजागर होता है। कथा बताती है कि क्यों शिवजी तपस्वियों के लिए स्त्री–संग को बाधक मानते हैं, और कैसे हिमालय अपने दलित हृदय से शिवजी से विनती करते हैं। यह अध्याय भक्ति, तप, विरक्ति, शिव–पार्वती संबंधों और हिमालय के उच्च आदर्शों का दिव्य समन्वय प्रस्तुत करता है। शिव पुराण की इस अद्भुत कथा में दिव्य ज्ञान, धर्म, तपस्या और शिव–भक्ति का अद्वितीय संगम है।शिव पुराण कथा, बारहवाँ अध्याय, पार्वती सेवा कथा, हिमालय शिव संवाद, शिव पार्वती कहानी, शिवजी तपस्या कथा, शिवपुराण हिंदी में, पार्वती जन्म कथा, पार्वती तपस्या, भगवान शिव कथा, शिव महापुराण अध्याय 12Shiv Puran Katha, Parvati Story, Himalayan King, Lord Shiva Tapasya, Parvati Seva, Shiv Parvati Dialogue, Bhagwan Shiv Katha, Hindi Devotional Podcast, Mythology Story Hindi, Spiritual Stories India#शिवपुराण #शिवकथा #पार्वतीकथा #हिमालयराजा #भगवानशिव #शिवतपस्या #पार्वतीसेवा #धार्मिककहानियाँ #हिन्दूमायथोलॉजी #आध्यात्मिककथा #शिवभक्ति | — | ||||||
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