
In this episode, Rajesh Joshi reflects on the themes of sacrifice and gratitude through the lens of Karbala.
कर्बला। राजेश जोशी पानी पियो तो याद करो प्यास इमाम हुसैन की! पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो बादलों का नदियों, तालाबों और समुंदरों का शुक्रिया अदा करो समुंदरों का समुद्रों का पानी पीने के काम न आए तो भी! पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो कुम्हारों का जिन्होंने बनाए पृथ्वी की तरह गोल मटके और बहुत सुंदर सुराहियाँ जिनकी गरदनें सुंदर स्त्रियों की तरह पतली और लंबी हैं! पानी पियो तो सोचो। काटी तो नहीं तुमने दूसरों की नहरें किसी की प्यास के रास्ते में तुम यज़ीद तो नहीं? पानी पियो तो याद करो उस शख़्स को तपते रास्तों में जिसने दिया गुड़ और पानी जिसने रास्तों में बिठाईं ठंडे पानी की सबीलें उसका शुक्रिया अदा करो! उसका भी जिसने कम से कम इच्छा की प्याऊ लगाने की! पानी पियो तो सोचो खारा तो नहीं हुआ है तुम्हारी आत्मा का जल पानी पियो तो सोचो नन्हे अली असग़र के बारे में सोचो कहीं अंधे तीर में तो नहीं बदल गई है तुम्हारी घृणा!
Host: नयी धारा रेडियो
Guest: राजेश जोशी
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