
The episode discusses the historical significance and cultural context of a cannon from 1857 located at Company Bagh.
तोप । वीरेन डंगवाल कंपनी बाग़ के मुहाने पर घर रखी गई है यह 1857 की तोप इसकी होती है बड़ी सम्हाल, विरासत में मिले कंपनी बाग़ की तरह साल में चमकाई जाती है दो बार सुबह-शाम कंपनी बाग़ में आते हैं बहुत से सैलानी उन्हें बताती है यह तोप कि मैं बड़ी जबर उड़ा दिए थे मैंने अच्छे-अच्छे सूरमाओं के छज्जे अपने ज़माने में अब तो बहरहाल छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग़ हो तो उसके ऊपर बैठ कर चिड़ियाँ ही अक्सर करती हैं गपशप कभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैं ख़ास कर गौरैयें वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद
Guest: वीरेन डंगवाल
Places: कंपनी बाग़
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